हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , क़ुम में हमदान के रहने वाले छात्रों और विद्वानों की एक सभा आयोजित हुई, जिसमें इस शहर के धर्मगुरुओं और छात्रों ने भाग लिया।
इस सभा में खुरासान के हौज़ा ए इल्मिया के शिक्षक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन नूर मोहम्मद नज़री शाहरूदी ने कहा कि हमदान विद्वानों और महान हस्तियों की धरती है। यहां मुल्ला हुसैनक़ुली हमदानी, आयतुल्लाह बहारी, बाबाताहिर, बू अली सीना और आयतुल्लाह नूरी हमदानी जैसी महान हस्तियों ने जन्म लिया और अपनी सेवाएं दीं।
उन्होंने इस शहर में सादात के महान स्थान का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां के लोग सादात से विशेष प्रेम रखते हैं। हम इमामज़ादों से बरकत हासिल करते हैं और समाज में उनका विशेष स्थान है। हमें उनकी महानता और प्रतिष्ठा से अनजान नहीं रहना चाहिए।
हुज्जतुल इस्लाम नज़री शाहरूदी ने 12 दिवसीय युद्ध का एक संस्मरण सुनाते हुए कहा कि इस युद्ध में उनके दो बच्चे शहीद हो गए। उनका बेटा हौज़ा का छात्र था, जबकि उनकी बेटी पूरे कुरआन की हाफिज़ा थी। उन्होंने कहा कि अल्लाह तआला कुरआन में फरमाता है:
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَقُولُوا قَوْلًا سَدِيدًا
ऐ ईमान लाने वालो! अल्लाह से डरो और सीधी तथा सच्ची बात कहा करो। (सूरह अल-अहज़ाब, 33:70)
उन्होंने बताया कि कई लोग मरहूम आयतुल्लाह बहजत (रह.) से आध्यात्मिक मार्गदर्शन और अमल का कोई विशेष नुस्खा पूछा करते थे। इस पर आयतुल्लाह बहजत (रह.) कहते थे कि सबसे बड़ा अमली निर्देश तक़वा-ए-इलाही है। तक़वा का अर्थ है कि जिन कामों को अल्लाह ने अनिवार्य किया है, उन्हें अंजाम दिया जाए और जिन कामों से मना किया है, उनसे परहेज़ किया जाए। इतना ही इंसान के लिए पर्याप्त है।
उन्होंने आगे आयतुल्लाह बहजत (रह.) का अपने उस्ताद आयतुल्लाह क़ाज़ी (रह.) से नकल किया हुआ कथन बयान करते हुए कहा,जो व्यक्ति अपनी नमाज़ अव्वल वक्त में अदा करता है, वह अपनी हर इच्छा तक पहुंचता है और अगर ऐसा न हो तो मुझे बुरा-भला कहे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कथन आयतुल्लाह क़ाज़ी (रह.) के इस बात पर गहरे विश्वास और यक़ीन को दर्शाता है। इसलिए हमें कम से कम उन धार्मिक शिक्षाओं पर अमल करना चाहिए जिन्हें हम जानते हैं।
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